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"घोर अवैधता कैसे बरती गई?" बिना परमिशन पेड़ काटने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछे सवाल

साउथ दिल्ली के रिज एरिया में बिना परमिशन पेड़ काटे जाने के मामले में आज भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. DDA के बाद अब दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर रहा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “दिल्ली सरकार को बताना होगा कि पेड़ों की कटाई में घोर अवैधता कैसे बरती गई ? डीडीए द्वारा किए गए घोर उल्लंघनों की जानकारी होने के बावजूद दिल्ली सरकार ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, “दिल्ली सरकार ने पेड़ काटने की इजाजत कैसे दी? साथ ही ये भी बताएं कि DDA के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?”

अदालत ने ये भी पूछा है कि क्या नियमों के तहत ट्री अथॉरिटी का गठन किया गया है? क्या ये अथॉरिटी समय- समय पर बैठक की. सुप्रीम कोर्ट ने ट्री अथॉरिटी को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने काटे गए 623 पेड़ों की लकड़ी के बारे में भी सवाल किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें 100% यकीन है कि लकड़ी ठेकेदार द्वारा ले जाई गई होगी. हल्के नोट पर, शरलॉक होम्स स्टोरी को संदर्भित करते हुए हम यह जानने के लिए उत्सुक हैं – ‘कुत्ता क्यों नहीं भौंका’.

सुप्रीम कोर्ट ने तीन फरवरी के LG दौरे के रिकॉर्ड देने के लिए और समय मांगने पर गहरी नाराजगी जताई. कहा कि हम खुश नहीं हैं. डीडीए के सदस्य, इंजीनियर  को दस दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा कि उस दिन LG दौरे के समय क्या हुआ था? जस्टिस एएस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि वो डीडीए अफसर के तौर पर नहीं, बल्कि कोर्ट के अफसर के तौर पर हलफनामा दाखिल करेंगे. 

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