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बंदूक के नहीं, विकास के साथ है भविष्य : ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ की बड़ी सफलता, 81 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय….

रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम’ के अंतर्गत साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े 52 माओवादी कैडरों ने हिंसा और हथियारों का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा विकास की मुख्यधारा को अपनाया है। इन पर कुल ₹1.41 करोड़ का इनाम घोषित था, जिससे यह आत्मसमर्पण अभियान अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक उपलब्धियों में शामिल हो गया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इसे हिंसा की विचारधारा पर विश्वास की निर्णायक विजय बताया और कहा कि पिछले 48 घंटों में कुल 81 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माओवाद अब केवल कमजोर नहीं पड़ रहा, बल्कि पूरी तरह बिखर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में अब माओवादी संगठन के साथ-साथ उसकी विकृत विचारधारा और उसका पूरा सपोर्ट सिस्टम भी ध्वस्त हो चुका है। जहाँ कभी भय, भ्रम और दबाव का माहौल था, वहाँ अब शासन की सशक्त उपस्थिति, सुरक्षा बलों की सक्रियता और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुँच ने लोगों में भरोसा पैदा किया है।

‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के तहत सरकार उन सभी भटके युवाओं को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और आजीविका के अवसर उपलब्ध करा रही है, जो हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, और यह व्यापक आत्मसमर्पण उसी भरोसे का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन को इस सफलता का आधार बताते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का संकल्प अब तेज़ी से निर्णायक लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि छत्तीसगढ़ में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि बस्तर में अब भय की जगह भविष्य आकार ले रहा है, जहाँ सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएँ, आजीविका और शासन की पहुँच लगातार मजबूत हो रही है।

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