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यूक्रेन-रूस युद्ध और End Game: पल में पाला बदल रहे ‘सुपरहीरो’, 5 किरदार और हरेक की अपनी चाल


नई दिल्ली:

“हर कोई सुखद अंत चाहता है. है न? लेकिन अंत हमेशा इस तरह से नहीं होता.”

2019 में आई सुपरहीरो मूवी एवेंजर-एंड गेम में टोनी स्टार्क (आयरमैन) का किरदार जब यह बात बोलता है तो मार्वल यूनिवर्स का हरेक फैन गूसबंप फील करता है. यूक्रेन-रूस युद्ध भी अपने एंडगेम की ओर बढ़ता जान पड़ रहा है और इसके समीकरण में फिट बैठे हर किरदार यह जानने को आतुर हैं कि अंजाम क्या होगा. अमेरिका दूसरे पाले में बैठे रूस से हैलो-हाय कर रहा है तो रूस उसे इशारों ही इशारों में साथ बैठने का न्योता दे रहा है. अचानक से बैकफुट पर खुद को पाता यूक्रेन अपना पाला मजबूत करने की हरेक कोशिश करता दिख रहा है तो यूरोपीय देश बदलते समीकरण में असमंजस की स्थिति में हैं.

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सवाल है कि यूक्रेन-रूस युद्ध की तीसरी सालगिरह पर तेजी से बदलती सामरिक रस्साकस्सी के इस एडगेंम में प्लॉट क्या लिखा जा रहा? कौन क्या इशारे कर रहा, कौन पाला बदल रहा? कौन दूर से लहर शांत होने का इंतजार कर रहा है? यहां कौन खुद को एवेंजर समझ रहा तो कौन थानोस? एक बात तो साफ है कि बिसात पर सभी अपनी आखिरी चालें चल रहे हैं.

US-रूस: एवेंजर-एंडगेम में ‘कैप्टन अमेरिका: सिविल वॉर’ का प्लॉट लिख रहे ट्रंप-पुतिन?

पत्रकार का सवाल – आपने राष्ट्रपति जेलेंस्की को डिक्टेटर कहा था. क्या आप राष्ट्रपति पुतिन को भी डिक्टेटर कहेंगे?

डोनाल्ड ट्रंप का जवाब – मैं ऐसे शब्द का इस्तेमाल आसानी से नहीं करता… देखिए आगे क्या कैसे होता है…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सिर्फ यह एक बयान यह बताने को काफी है कि यूक्रेन-रूस युद्ध का पूरा प्लॉट ही कितनी तेजी से बदल रहा है. जो अमेरिका कल तक हर स्थिति में यूक्रेन के साथ खड़ा रहने की बात करता था, वहां के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुर्सी पर कमबैक करने के साथ ही पाला बदलने के संकेत दे दिए हैं. वहीं दूसरी तरफ दूसरी तरफ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ट्रंप को एक इशारा भेजा है. पुतिन ने सोमवार, 24 फर को कहा कि वह कब्जे वाले यूक्रेन में रणनीतिक खनिजों में अमेरिकी निवेश के लिए तैयार हैं.

पुतिन ने टेलीविजन पर दिए बयानों में कहा कि रूस “हमारे नए क्षेत्रों में” भी दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के भंडार विकसित करने पर “अमेरिकियों सहित विदेशी पार्टनर्स” के साथ काम करने के लिए तैयार है. पुतिन का इशारा रूस द्वारा नियंत्रित यूक्रेन के क्षेत्रों पर था.

यूक्रेन के जिन क्षेत्रों पर रूस ने सैन्य बलों की मदद से कब्जा कर लिया है, उसका जिक्र करते हुए पुतिन ने कहा, “हम अपने तथाकथित नए क्षेत्रों में विदेशी पार्टनर्स को आकर्षित करने के लिए भी तैयार हैं.” 

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तो इसे एवेंजर-एंडगेम में ‘कैप्टन अमेरिका: सिविल वॉर’ वाला ट्विस्ट क्यों न माना जाए? यहां तो पश्चिमी एलायंस को चकमा देकर डोनाल्ड ट्रंप रूस को अपने साथ लाने का इशारा कर रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि ‘अमेरिका फर्स्ट’ का बैनर उठाए डोनाल्ड ट्रंप रूस को अपने खेमे में खींचकर दुनिया में नए ग्लोबल ऑर्डर को आकार देने की कोशशि में जुटे हैं.

राष्ट्रपति बनने के 24 घंटों के अंदर यूक्रेन-रूस युद्ध खत्म करने का चुनावी वादा करने वाले ट्रंप किसी भी कीमत पर शांति वाली डील करना चाहते हैं, भले ही यह यूक्रेन को विलेन बताकर क्यों न हो. ट्रंप की टीम यह मानती है कि यह युद्ध दरअसल शीत युद्ध के बाद नाटो (NATO) के विस्तार के लिए अमेरिका के प्रयास का परिणाम है. शीत युद्ध के बाद रूस जब कमजोर पड़ा तो अनियंत्रित अमेरिकी प्रभुत्व के बीच रूस को इतना पीछे ढकेल दिया गया कि वह फिर से खड़ा होने के बाद युरोप की सबसे संवेदनशील कड़ियों को चुनौती देने लगा. 2008 में जॉर्जिया, 2014 में क्रीमिया तो 2022 में पूरा यूक्रेन ही वॉर फ्रंट बन गया.

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अब ट्रंप यह मानते हैं कि शांति के लिए कोई भी समझौता सीधे अमेरिका और रूस के बीच होना चाहिए. उनके और पुतिन के बीच. इसके लिए उन्हें यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की को विलेन बताने से भी गुरेज नहीं. वहीं दूसरी ओर पुतिन भी जानते हैं कि भले ही उन्होंने इन तीन सालों में यूक्रेन के पांचवें हिस्से पर कब्जा कर लिया है, लेकिन यह युद्ध पहले ही काफी महंगा साबित हो चुका है. इसे और आगे खिंचने से अच्छा है कि बनी बनाई बढ़त को पुख्ता कर लिया जाए. इसी कवायद के रूप में उन्होंने रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में अमेरिका और तमाम विदेशी पार्टनर्स को निवेश के लिए न्योता भेजा है. वह जानते हैं कि इससे कब्जे को वैधता ही मिलेगी. कुल मिलाकर मामला विन-विन का है.

यूक्रेन: एंडगेम जारी लेकिन कमबैक की जगह और पड़ रही मार

फिल्मों में क्या होता है? हमें यकीन होता है कि पूरी फिल्म में भले हीरो कितना भी पिट जाए, लेकिन आखिर में वो कमबैक करता है. लेकिन यूक्रेन-रूस युद्ध के इस एंडगेम में यूक्रेन के लिए ऐसा होता नहीं दिख रहा है (वो खुद को तो इस कहानी में हीरो मानता ही होगा.) सुखद अंत तो दूर यूक्रेन के लिए मुश्किलें और बढ़ती दिख रही हैं. 

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जेलेंस्की को न सिर्फ युद्ध के मैदान में हार का सामना करना पड़ रहा है बल्क ट्रंप की ट्रोलिंग की मार भी झेलनी पड़ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने जेलेंस्की को “तानाशाह” तक करार दे चुके हैं. जेलेंस्की ने यहां तक हिंट दे दिया कि दरअसल ट्रंप रूस के दुष्प्रचार का शिकार हो गए हैं. उनका रूस के साथ चल रहे शांति डील पर कोई प्रभाव ही नहीं है.

यूक्रेन के लिए मुश्किलें केवल सामरिक मोर्चे पर नहीं हैं. ट्रंप तो यहां तक चाहते हैं कि यूक्रेन वो 350 अरब डॉलर वापस करे जो कथित तौर पर अमेरिका ने युद्ध पर खर्च किए हैं. ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट को अमेरिकी समर्थन के बदले में यूक्रेन के खनिज भंडार तक पहुंच पर बातचीत करने का काम सौंपा गया था.

यूरोप: लड़ाई में जिस सीनियर को बुलाया, वो ही पाला बदलने लगा

अब इस पूरे एंडगेम में यूरोपीय देशों की हालत उस बच्चे जैसी हो गई है जिसने सीनियर के दम पर तो दूसरे मुहल्ले के बच्चों से लड़ाई तो कर ली लेकिन आखिर में सीनियर ही पाला बदलने लगा हो. ट्रंप अपने सभी यूरोपीय पार्टनर्स को बाइपास करके शांति समझौता करने निकले हैं. 

17 फरवरी को, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर चर्चा करने के लिए पेरिस में एक आपातकालीन शिखर सम्मेलन बुलाई और तमाम यूरोपीय नेताओं की मेजबानी की. लेकिन इसके एक दिन बाद ही जब अमेरिका और रूस के शीर्ष डिप्लोमेट सऊदी अरब में बात करने बैठे तो मेज पर न तो यूक्रेन था और न ही यूरोप का कोई देश.

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यूरोपीय देशों की मुश्किल यह है कि सिर्फ अमेरिकी हितों की बात करते ट्रंप की वजह से अब उन्हें अकेले रूस की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं से निपटना होगा. सोमवार, 24 फरवरी को जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात की तो उन्होंने कहा कि यूक्रेन में कोई भी शांति समझौता सुरक्षा गारंटी के साथ होना चाहिए.

उन्होंने कहा, “यह शांति यूक्रेन का आत्मसमर्पण नहीं होनी चाहिए.”

वहीं ट्रंप ने खुद किसी सुरक्षा गारंटी का जिक्र नहीं किया. इसकी जगह उन्होंने कहा कि यूक्रेन में शांति सुनिश्चित करने में जो खर्चा आ रहा है, उसका भुगतान यूरोपीय देशों को करना होगा, न कि केवल अमेरिका को. यानी कुल मिलाकर यूरोपीय देश सकते में दिख रहे हैं. यूरोपीय देश और अमेरिका, दोनों ही चाहते हैं कि यूक्रेन-रूस युद्ध खत्म हो लेकिन दोनों इसे अलग-अलग तरीके से चाहते हैं. 

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चीन: एंडगेम में अभी खामोश लेकिन ऑब्जर्बर से कहीं ज्यादा

चीन अभी इस ऐंड गेम का खामोश खिलाड़ी है. रूस पर उसकी निगाहें टिकी हैं. इसकी एक वजह यह भी है कि उसने रूस में उसने जमकर पैसा लगाया है. दोनों देशों के बीच 2023 में द्विपक्षीय व्यापार 240 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. यह एक साल के अंदर यानी 2022 से 26.3 प्रतिशत की वृद्धि थी.

ऐसे में यह बात समझ लेनी चाहिए कि इस एंडगेम में अभी चीन भले खामोश प्लेयर है लेकिन वह ऑब्जर्बर से कहीं ज्यादा है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को उम्मीद थी कि उन्हें भी उस मेज पर बैठाया जाएगा जिसपर अमेरिका और रूस बैठकर शांति समझौते की बात करते. लेकिन ऐसा हुआ नहीं है. चीन को यह बात भी परेशान कर सकती है कि एक बार जब रूस और अमेरिका अपने मतभेदों को दूर कर लेंगे और यूक्रेन में कुछ हद तक शांति हासिल कर लेंगे, तो ट्रंप अपना ध्यान चीन की ओर केंद्रित करने के लिए स्वतंत्र हो जाएंगें.

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तो कुल जमा यह है कि इस पूरे एंडगेम में डोनाल्ड ट्रंप वो धूरी बने हुए हैं जिसकी ओर सबने निगाहें टिकाई हुई हैं. बिसात पर किरदार कई हैं और सबकी चालें अलग. अमेरिका-रूस से लेकर यूक्रेन तक, इन सभी को टोनी स्टार्क की यह बात याद रखनी चाहिए कि एंडगेम में जरूरी नहीं कि अंजाम सुखद ही हो. वर्ल्ड ऑर्डर के इस रस्साकस्सी में कई ऐसे वैरिएबल हैं जो किसी भी मौके पर इस फिल्म का प्लॉट बदल सकते हैं. आयरन मैन थानोस से हाथ भी मिला सकता हैं और उसके लिए ‘आई लव यू 3000′ भी बोल सकता है.


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