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यूपी सरकार संभल में 1978 में हुए दंगे की फाइलें ढूंढ रही, The Hindkeshariके पास एक एक्‍सक्‍लूसिव फ़ाइल

 The Hindkeshariके पास मौजूद संभल दंगे से जुड़ी फाइल

The Hindkeshariके पास मौजूद 1978 संभल दंगे से जुड़ी फाइल

मुलायम सरकार ने संभल दंगे से जुड़े 8 केस लिये थे वापस…! 

अब तक 1978 दंगे से जुड़ी कई फाइलें मिल चुकी हैं. एक फ़ाइल मुक़दमा वापसी का है. मुलायम सिंह यादव, तब यूपी के मुख्यमंत्री थे. बात 23 दिसंबर 1993 की है. केस वापसी के सरकारी आदेश की एक चिट्ठी The Hindkeshariइंडिया को मिली है. गृह विभाग के विशेष सचिव ने मुरादाबाद के उस समय के डीएम को चिट्ठी लिखी है. इसमें आठ मुकदमे वापस लेने के आदेश दिए गए हैं. सूत्र बताते हैं कि आज़म खान और शफ़ीकुर रहमान बर्क जैसे प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं के दवाब में मुलायम सिंह ने ये फ़ैसला किया था. आज़म ख़ान अब जेल में बंद हैं. साल 1993 में वे मुलायम सरकार में मंत्री थे. शफीकुर रहमान का निधन हो चुका है. वे खुद कई बार संभल से सांसद रहे. अब उनके पोते जिया उर रहमान बर्क संभल के सांसद हैं. हाल में हुई हिंसा के मामले में उन पर केस भी दर्ज हुआ है. 

क्‍या ये है योगी सरकार की रणनीति!

यूपी की योगी सरकार ये बताना करना चाहती है कि 1978 के दंगों में हिंदुओं के साथ अन्याय हुआ. पहले उन्हें मारा गया… फिर उनकी संपत्ति छीन ली गई. केस दर्ज  हुए तो भी सारे आरोपी छोड़ दिए गए. मामलों की सुनवाई के दौरान न तो ठीक से गवाही हुई और न ही केस की पैरवी हुई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने धर्म देख कर काम किया. अब इन फाइलों के मिलने और उनकी जाँच के बाद बीजेपी को चुनावी मुद्दा मिल सकता है. दो साल बाद 2027 में यूपी मैं विधानसभा के चुनाव होने हैं. मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद से ही पश्चिमी यूपी का राजनीतिक समीकरण बदल गया है. संप्रदायक ध्रुवीकरण होने पर बीजेपी को फायदा हो सकता है. पश्चिमी यूपी के कई जिलों में मुसलमानों की अच्छी आबादी है. लेकिन रामपुर और कुंदरकी जैसी सीटों पर भी अब बीजेपी का क़ब्ज़ा है. 

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1978 के सांप्रदायिक दंगों के दो गवाहों अभी जिंदा हैं

सूत्रों के मुताबिक, 1978 के सांप्रदायिक दंगों के दो गवाहों और चार आरोपियों के अभी जिंदा होने की जानकारी मिली है. इनकी खोजबीन जारी है. दंगे के समय संभल मुरादाबाद जिले का हिस्सा था. संभल दंगों की दस फाइलें मिली हैं. कई मुकदमों में 2010 में आरोपियों को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर था. फाइलें तो मिल गयी हैं, लेकिन अभी उनसे संबंधित कई रिकॉर्ड नहीं मिले हैं. इन फाइलों में राज्य बनाम रिज़वान, राज्य बनाम मुनाज़िर और राज्य बनाम वाजिद जैसे केस की फ़ाइल हैं. इनमें  धारा 147, 148 ,149, 395, 397, 436 और 307 आईपीसी की धाराओं में केस दर्ज हुए थे.  



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