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RLD को BJP का क्या है ऑफर? हरियाणा में कांग्रेस अकेले क्यों? INLD-JJP क्या करेंगे खेला?

Haryana Assembly Election 2024 : हरियाणा में वर्तमान में भाजपा (BJP) की सरकार है. उसकी चुनौती राज्य में अपनी सत्ता बरकरार रखने की है. हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में राज्य में विपक्षी वोटों के एकजुट होने से भाजपा की सीटों की संख्या घटकर पांच रह गई तथा शेष सीट कांग्रेस के खाते में चली गईं. पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य में सभी 10 सीट पर जीत हासिल की थी. इसी कारण भाजपा अब राष्ट्रीय लोकदल (RLD) से बात कर रही है. RLD हरियाणा में चार सीटों की मांग कर रही है. मगर भाजपा  RLD को एक या दो सीटें ही देने को तैयार है. इसके साथ ही विधायक गोपाल कांडा और विनोद शर्मा के भी संपर्क में भाजपा है. 

आज शाम या कल तक घोषणा

भाजपा के साथ कुछ दिनों पहले तक गठबंधन में रही जननायक जनता पार्टी (JJP) ने चंद्रशेखर के साथ गठबंधन कर लिया है. हरियाणा का विधानसभा चुनाव BJP के लिए खासी अहमियत रखता है. यही वजह है की दिल्ली में लगातार बैठकों का सिलसिला चल रहा है. आज सुबह दस बजे से जेपी नड्डा के आवास पर भाजपा हरियाणा कोर ग्रुप की बैठक चल रही है. सूत्रों का कहना है कि 40 से 60 उम्मीदवारों के नाम लगभग फाइनल हो चुके हैं. आज शाम को सात बजे केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक है. इसमें प्रधानमंत्री भी शिरकत करेंगे. इस बैठक में फाइनल नामों की सूची रखी जाएगी और फिर अंतिम मोहर केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में लगेगी. 

भाजपा का प्लान ए

जाट वोटर्स को लुभाने के लिए BJP ने अपने सहयोगी दल RLD की मदद लेने की योजना बनाई है. RLD के साथ लगातार बातचीत चल रही है. हालांकि RLD चार विधानसभा सीटें मांग रही है, लेकिन जो सूत्र हैं वो ये कह रहे हैं कि एक से दो सीटें ही RLD को BJP दे सकती है. जयंत चौधरी के साथ में अभी सीटों के बंटवारे को लेकर बात चल रही है. बताया जा रहा है कि RSS ने हरियाणा में एक सर्वे कराया था और उसमें बताया गया कि सीटिंग विधायकों के खिलाफ जमीन पर नाराजगी है. इसी के चलते करीब तीस प्रतिशत सीटिंग विधायकों के टिकट भी काटे जाएंगे और उनकी जगह नए चेहरों को BJP मौका देगी. 

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भाजपा का प्लान बी

बीते दस साल से BJP लगातार सत्ता में बनी हुई है और ऐसे में सत्ता विरोधी लहर को कम करने के लिए BJP चुनावी रणनीति बना रही है. इसके लिए तीसरी योजना यह है कि पार्टी के बड़े नेताओं और उनके बच्चों को भी टिकट दिया जाए. इसमें किरण चौधरी, राव इंद्रजीत सिंह आदि नेताओं के बच्चों को टिकट देने की बात चल रही है. किरण चौधरी एक जाट नेता मानी जाती हैं अभी राज्यसभा का टिकट BJP ने उनको दिया था. इसी तरीके से राव इंद्रजीत सिंह का प्रभाव गुरुग्राम के पास के इलाके में है. उम्मीद जताई जा रही है कि आज देर रात को या फिर कल BJP की पहली सूची आ सकती है और इस पहली लिस्ट में चालीस से लेकर साठ नाम तक हो सकते हैं.

नायब सिंह सैनी चेहरा

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को सबसे ज्यादा 40 सीट मिलीं. कांग्रेस 31 सीट जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी. विधानसभा चुनाव में जननायक जनता पार्टी (जजपा) 10 सीट जीतने में सफल रही. सात सीटें निर्दलीय को, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को एक और हरियाणा लोकहित पार्टी को एक सीट पर जीत मिली. बाद में भाजपा ने जजपा के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाई. मनोहर लाल खट्टर फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने जबकि जजपा के दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री बने. हालांकि लोकसभा चुनाव में सीट साझेदारी को लेकर असहमति के बाद यह गठबंधन टूट गया. बाद में भाजपा ने निर्दलीय विधायकों के समर्थन के दम पर अपनी सरकार बचा ली. कुछ दिनों के बाद भाजपा ने खट्टर को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया और नायक सिंह सैनी को राज्य की कमान सौंपी.

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जजपा 2 सितंबर को करेगी घोषणा

हरियाणा में विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है और सभी राजनीतिक दल चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं. इसी बीच, जननायक जनता पार्टी (जजपा) के सुप्रीमो अजय सिंह चौटाला ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है. उन्होंने बुधवार को ऐलान किया कि जजपा 2 सितंबर को अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगी और साथ ही पार्टी का घोषणा पत्र भी जारी किया जाएगा.  दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली जननायक जनता पार्टी (जजपा) और चंद्रशेखर आजाद नीत आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगी. दोनों पार्टियों के प्रमुखों ने मंगलवार को गठबंधन का ऐलान किया. दोनों नेताओं ने मंगलवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गठबंधन के तहत जजपा 70 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) राज्य की 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. 

कांग्रेस जाट वोटरों के भरोसे

कांग्रेस का सबसे बड़ा वोट बैंक फिलहाल जाट और मुसलमान हैं. मुसलमान जहां कांग्रेस के पक्ष में देश भर की तरह हरियाणा में भी एकतरफा साथ है, वहीं जाट वोटर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कारण है. भूपेंद्र सिंह हुड्डा जाट समुदाय को एकजुट किए हुए हैं और किसान आंदलोन से लेकर महिला पहलवानों के मुद्दे को जाट बनाम भाजपा बनाने में कामयाब हुए हैं. कांग्रेस का फिलहाल किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं हुआ है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. कांग्रेस को उम्मीद है कि जाट, मुस्लिम और सत्ता विरोधी लहर उसकी सत्ता में वापसी करवा देगी. इसी वजह से वह किसी भी दल से समझौते के मूड में नहीं है.

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इनेलो का क्या होगा?

इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) का बसपा से गठबंधन हुआ है. बसपा ने 4 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा भी कर दी है. ये गठबंधन भी हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगा. जाहिर है ये गठबंधन भी कांग्रेस, भाजपा, जजपा का खेल बिगाड़ सकता है. देखना ये है कि हरियाणा की जनता किस गठबंधन को चुनती है या फिर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को अकेले लड़ने का इनाम देगी? 


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