देश

कौन हैं शंकर सिंह? जिन्होंने बीमा भारती को हराने के साथ JDU के गढ़ रुपौली में लगाई 15 साल बाद सेंध

Latest and Breaking News on NDTV

बीमा भारती को उनके ही गढ़ में मात देने वाले शंकर सिंह हैं कौन ? 

अगर शंकर सिंह के शुरुआती जीवन की बात करें तो वह राजनीति में आने से पहले इस इलाके में एक बाहुबली के तौर पर जाने जाते थे. यही वजह है कि आज शंकर सिंह की छवि एक बाहुबली नेता की है. शंकर सिंह की राजनीति में एंट्री 2005 में हुई. उन्होंने उस दौरान ना सिर्फ लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा बल्कि विधायक बनकर विधानसभा भी पहुंचे. रुपौली इलाके में अगड़ी जाति के बीच उनकी छवि एक रॉबिन हुड की है. शंकर सिंह इस बार के उपचुनाव में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे. उनके सामने राष्ट्रीय जनता दल की बीमा भारती और जनता दल यूनाइटेड के कलाधर मंडल को हराने की चुनौती थी. 

Latest and Breaking News on NDTV

इस वजह से भरा था निर्दलीय पर्चा

शंकर सिंह के करीबियों की मानें तो उनको अपनी जनता पर पूरा भरोसा था. उन्हें मालूम था कि अगर वह इस बार के चुनाव में निर्दलीय भी मैदान में उतरे तो उन्हें जीतने से कोई नहीं रोक सकता. जनता पर उनका ये विश्वास ही था जिसकी बदोलत वो इस बार के चुनाव में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लड़े. और ना सिर्फ लड़े बल्कि इस सीट को अपने नाम भी किया. 

Latest and Breaking News on NDTV

बीमा भारती को पप्पू यादव का था समर्थन, फिर भी शंकर सिंह ने मारी बाजी

रुपौली उपचुनाव से पहले पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने आरजेडी उम्मीदवार बीमा भारती को अपना समर्थन देने का ऐलान किया था. पप्पू यादव का समर्थन मिलने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि इस उपचुनाव में बीमा भारती का जीतना अब लगभग तय है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि पप्पू यादव सीमांचल क्षेत्र के चर्चित बाहुबली हैं और इस लोकसभा चुनाव में उन्होंने पूर्णिया सीट को बड़े अंतर के साथ जीता भी है. ऐसे में ये तो तय था कि पप्पू यादव जिस भी उम्मीदवार का समर्थन करेंगे जनता उसके लिए खासतौर पर मतदान करेगी. लेकिन शंकर सिंह ने अपनी जीत के साथ ही पप्पू यादव के इस तिलिस्म को भी तोड़ दिया. जनता ने शंकर सिंह को जीताने के साथ ही ये भी बता दिया दी कि अब उन्हें बीमा भारती से कहीं ज्यादा भरोसा शंकर सिंह पर है. 

यह भी पढ़ें :-  Sharad Pawar Birthday: PM मोदी और CM योगी ने शरद पवार को दी जन्मदिन की बधाई



Show More

संबंधित खबरें

Back to top button