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कौन हैं बिहार के नए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, जिन पर बीजेपी ने खेला बड़ा दांव!

नई दिल्ली:  बीजेपी, जेडीयू और अन्य सहयोगियों के साथ बिहार में एकबार फिर एनडीए की सरकार बनी और नीतीश कुमार CM बने हैं. नीतीश कुमार के साथ सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने भी शपथ ग्रहण किया है. बीजेपी ने कोइरी समाज के सम्राट चौधरी को डिप्टी CM बनाकर बड़ा मैसेज दिया है, जिसका असर अगामी लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा.

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सम्राट चौधरी के पिता, शकुनी चौधरी एक सैन्यकर्मी से राजनेता बने थे, जिन्होंने कांग्रेस से शुरुआत की और अक्सर कट्टर प्रतिद्वंद्वी लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के पार्टी में आते-जाते रहे. सम्राट RJD सुप्रीमो की पत्नी राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री थे और 2005 में सत्ता से बाहर होने के बाद काफी समय तक पार्टी के साथ रहे. सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं. उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर के लखनपुर गांव में हुआ था.

सम्राट चौधरी 2014 में, वह एक विद्रोही गुट का हिस्सा बन गए और जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली जेडी यू सरकार में शामिल हो गए, जिन्होंने कुमार के पद छोड़ने के बाद सत्ता संभाली थी. तीन साल बाद, उनका जेडीयू से मोहभंग हो गया और वे बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने सम्राट चौधरी को कोइरी जाति से संबंधित नेता के रूप में उनकी क्षमता को पहचाना. कहा यह भी जा रहा है कि बीजेपी मे अगामी चुनावों से पहले सम्राट चौधरी पर बड़ा दाव खेला है. उनको डिप्टी CM बनाने के पीछे बड़ी संख्या में लव (कुर्मी) और कुश (कुशवाहा) वोटों को अपने पाले में लाने के रुप में देखा जा रहै है.

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सम्राट चौधरी को पहले बीजेपी राज्य इकाई का उपाध्यक्ष बनाया गया और बाद में उन्हें विधान परिषद में जगह दी गई. 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद वह नीतीश कुमार सरकार में मंत्री बने. चौधरी को पिछले साल मार्च में राज्य भाजपा अध्यक्ष नामित किया गया था, जब उन्होंने लोकसभा सांसद संजय जयसवाल की जगह ली थी, जिस पर राबड़ी देवी की व्यंग्यात्मक टिप्पणी “बनिया से दिल भर गया तो महतो को बना दिया” आई थी.

नीतीश कुमार के मुखर आलोचक माने जाने वाले चौधरी ने पिछले साल जेडीयू सुप्रीमो द्वारा भाजपा का साथ छोड़ने के बाद पगड़ी पहनना शुरू कर दिया था और कहा था कि उनकी पार्टी के सत्ता में लौटने के बाद ही वह इसे उतारेंगे. जेडीयू अध्यक्ष कुमार ने यह कहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया कि महागठबंधन और विपक्षी दल इंडिया में उनके लिए “चीजें अच्छी तरह से काम नहीं कर रही थीं.

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