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आखिर क्यों हो रहा है NEET-UG ने नतीजों पर विवाद? सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला


नई दिल्‍ली:

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency) ने मंगलवार को नीट परिणाम 2024 (NEET Results 2024) की घोषणा कर दी है. इस साल 13 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने नीट यूजी की परीक्षा (NEET UG Exam) पास की है, जिसमें से 67 उम्मीदवारों ने नंबर वन रैंक हासिल की है. इसी को लेकर विवाद है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों ने कैसे टॉप किया. साथ ही कई अन्‍य सवाल भी खड़े हो रहे हैं. कुछ बच्‍चों को 720 अंकों के पेपर में से 718 और 719 अंक भी मिले हैं. इस पर जानकारों ने सवाल उठाया है और उनका कहना है कि आखिर इतने नंबर्स कैसे मिल गए. आपको विस्‍तार से बताते हैं कि आखिर ये विवाद क्या है और क्यों इस पर इतने सवाल खड़े हो रहे हैं. उधर, अब यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है.  

नीट-यूजी परीक्षा में 67 छात्रों ने टॉप किया है. कई छात्रों को 718 और 719 अंक मिले हैं. इसका पेपर 720 अंकों का होता है और ऐसे में हर सवाल पर यहां पर चार अंक मिलते हैं. सही जवाब पर चार अंक और गलत जवाब पर एक अंक की नेगेटिव मार्किंग होती है. ऐसे में यदि कोई सभी सवाल सही करता है तो उसे 720 अंक मिलते हैं और कोई एक सवाल छोड़ता है तो उसे 716 अंक बनते हैं और एक सवाल का अगर किसी ने गलत जवाब दिया तो 715 अंक बनते हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि फिर बच्‍चों के 718 और 719 नंबर कैसे आ गए. 

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विवाद बढ़ने पर एनटीएल ने ये दिया है जवाब 

इन बच्चों को जो नंबर मिले हैं इस पर एनटीएल ने कहा कि जब यह एग्जाम हुआ था, तब कुछ बच्चों को देर से पेपर मिला था और इसकी वजह से ग्रेस मार्क्स दिए गए हैं. ग्रेस मार्क्स की वजह से ही यह फर्क दिख रहा है. कई जगह पर परीक्षा में समय की बर्बादी हुई थी और कुछ जगह पर 20 मिनट तक देरी से पेपर मिले थे, जिसकी शिकायत बच्चों ने एनटीएस से की थी और उसके बाद यहां पर ग्रेस मार्क्स दिए गए. उन बच्चों को जिनका वक्त बर्बाद हुआ था उनको ये गेस्ट मार्क्स जो है मिले हैं और इस वजह से 718 या 719 नंबर्स जो आए हैं ये उसकी वजह हो सकती है. 

दरअसल नीट परीक्षा में केमिस्ट्री का एक प्रश्न था, जिसे लेकर विवाद हो रहा है. इस सवाल के दो जवाब सही होने पर सवाल उठे हैं. दरअसल, एनसीआरटी की एक पुरानी किताब में एक जवाब को सही बताया गया था और नई किताब में भी जो दूसरे जवाब को सही बताया गया था. इस वजह से जो अंक हैं उन दोनों जवाबों को देने वाले बच्चों को मिले और यहां पर इस तरह से 44 छात्रों को पूरे मार्क्स मिल गए और वो टॉपर बन गए. ऐसे में टॉपर ज्यादा हो गए. अब यह सवाल भी उठा कि इतने ज्यादा बच्चों ने टॉप आखिर कैसे कर लिया. 

इतने टॉपर कैसे बने?: यह दिया जा रहा है तर्क 

इस पर तर्क दिया गया कि इसके पीछे परीक्षा आसान होने की वजह हो सकती है. रजिस्ट्रेशन में इस बार इजाफा हुआ, बड़ी संख्या में बच्चों ने अटेंप्‍ट किया था और इस वजह से नतीजे कुछ इस तरह के रहे हैं और बड़ी तादाद में बच्‍चों ने परीक्षा पास की.

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नाराज छात्रों और अभिभावकों का सोशल मीडिया पर गुस्‍सा 

हालांकि लोग इससे खुश नहीं हैं. अब इसके बाद सोशल मीडिया पर बच्चों और उनके अभिभावकों का गुस्‍सा देखने को मिल रहा है. कुछ लोगों ने नीट यूजी परीक्षा को रद्द करने की मांग की है. 

अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा नीट-यूजी परीक्षा का मामला 

नीट-यूजी परीक्षा 2024 को नए सिरे से कराने की मांग पर कुछ छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. साथ ही उन्‍होंने 5 मई को आयोजित परीक्षा को रद्द करने की मांग की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि 5 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी की गई थी, क्योंकि याचिकाकर्ताओं के संज्ञान में पेपर लीक के कई मामले आए थे. याचिका में कहा गया है कि नीट परीक्षा का पेपर लीक होना संविधान के तहत अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है, क्योंकि इसने कुछ उम्मीदवारों को दूसरों पर अनुचित लाभ दिया है, जिन्होंने निष्पक्ष तरीके से परीक्षा देने का विकल्प चुना था. 

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