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महिला दिवस : कहानी उन महिलाओं की… जिन्होंने पुलिसिंग क्षेत्र की बाधाओं को पार कर हासिल किया मुकाम

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, हम उन जांबाज महिलाओं की कहानियों को याद करते हैं जिन्होंने अपने संघर्ष और मेहनत से पुलिसिंग के क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है. ये महिलाएं समाज की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं. इन महिलाओं ने अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उनकी कहानियां हमें यह याद दिलाती हैं कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं.

दिल्ली पुलिस की महिला अधिकारी सीमा तुषित ने कहा कि जीवन में हर कदम पर जोखिम होता है, लेकिन जब आप बच्चों को उनकी मां से मिलवाते हैं, तो हर जोखिम भूल जाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि उनके माता-पिता बहुत ही खुले विचार के हैं और उनके घर के लोगों ने भाई-बहन में कोई अंतर नहीं समझा. परिवार ने उन्हें अवसर दिया और समर्थन किया.

सीमा तुषित ने यह भी कहा कि अभिभावकों को बच्चों के साथ दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए और उन्हें सोचने और फैसला लेने की छूट देनी चाहिए. परिवार को बच्चे के साथ सलाह-मशविरा करनी चाहिए और उनकी भावनाओं को समझना चाहिए. बता दें कि सीमा तुषित मानव तस्करी के चंगुल में फंसे करीब 200 से अधिक बच्चों को बचा चुकी हैं.

दिल्ली पुलिस की महिला अधिकारी सुमन ने अपने जीवन के अनुभवों के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि वह रोहतक जिले के एक छोटे से गांव से आती हैं और शुरुआत में लोग उन्हें खेती के लिए काम करने की सलाह देते थे, पढ़ाई के लिए नहीं.

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सुमन ने आगे कहा कि उनकी माताजी ने उनकी पढ़ाई और पुलिस की तैयारी के लिए बहुत मेहनत की. लोग उन्हें ताने मारते थे, लेकिन उनकी माताजी ने किसी की नहीं सुनी और उन्हें पुलिस की तैयारी के लिए तैयार किया सुमन ने गर्व से कहा कि वह और उनकी दो बहनें पुलिस में कार्यरत हैं.

 


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