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"लोगों के साथ विश्वासघात" : निठारी केस में जांच पर निशाना साधते हुए इलाहाबाद HC की CBI को फटकार

निठारी केस में कुल 19 मुकदमे दर्ज हुए थे. इनमें से इसमें कोली को 12 और पंधेर को 2 मामलों में राहत मिली है. इसके साथ ही उसे सभी मुकदमों में बरी कर दिया गया है. हालांकि, कोली को सुप्रीम कोर्ट ने एक केस में फांसी की सजा सुनाई है, जो फिलहाल बरकरार रहेगी.

बेंच ने अपने फैसले में कहा, “अभियोजन पक्ष का रुख समय-समय पर बदलता रहा… निठारी हत्याकांड में महिला व बाल विकास मंत्रालय की बनाई गई हाई लेवल कमेटी की गई विशिष्ट सिफारिशों के बावजूद अंग व्यापार में संलिप्तता की जांच में नाकामी किसी विश्वासघात से कम नहीं है. जिम्मेदार एजेंसियों ने जनता का भरोसा तोड़ा है.”

पंधेर और कोली ने गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. ये फैसला जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र और जस्टिस एसएचए रिजवी की बेंच ने सुनाया है. लंबी चली बहस के बाद अपीलों पर फैसला सितंबर में सुरक्षित कर लिया गया था. अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपने मामले को सिद्ध करने में नाकाम रहा. 

अदालत ने अपने डिटेल ऑर्डर में कहा, “इस केस की जांच खराब तरीके से हुई है. सबूत इकट्ठा करने के बुनियादी मानदंडों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है.” अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी का तरीका, सबूतों की बरामदगी और कबूलनामे की रिकॉर्डिंग आकस्मिक और सहज थी.

पंधेर के घरेलू नौकर सुरिंदर कोली के कबूलनामे पर आधारित मामले को पढ़ते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश में कहा, ”हमें ऐसा लगता है कि जांच में शरीर के अंगों के व्‍यापार की संभावित संलिप्तता के ज्यादा गंभीर पहलुओं की जांच पर ध्यान दिए बिना, घर के एक बेचारे नौकर को दरिंदा बनाकर फंसाने का आसान तरीका चुना गया.” 

जांचकर्ताओं ने कहा कि कोली ने हत्या, शवों से रेप और इंसानी मांस खाने की बात कबूल कर ली है. हत्याएं नोएडा में पंढेर के घर में हुईं और दिसंबर 2006 में बगल के नाले में शरीर के टुकड़े पाए जाने के बाद लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. उससे पहले इलाके में कई बच्चों के लापता होने की सूचना मिली थी.

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अदालत ने कहा, “जिस तरह से आरोपी की मेडिकल जांच के बिना 60 दिनों की पुलिस रिमांड के बाद कबूलनामा दर्ज किया गया; कानूनी सहायता नहीं दी गई, कबूलनामे में यातना के विशिष्ट आरोप को नजरअंदाज किया गया, सीआरपीसी की धारा 164 की जरूरत का पालन करने में नाकामी कम से कम चौंकाने वाला है.”

2006 में निठारी गांव की कोठी नंबर डी-5 से नरकंकाल मिला था. वहीं, कोठी के पास नाले से बच्चों के अवशेष बरामद किए गए थे. निठारी कांड का खुलासा लापता लड़की पायल की वजह से हुआ था. चर्चाओं में आने के बाद यह पूरा मामला देशभर के लोगों के बीच फैल गया. यहां से मानव शरीर के हिस्सों के पैकेट मिले थे. नरकंकालों को नाले में फेंका गया था. शिकायत के बाद दिसंबर 2006 में पुलिस ने जांच शुरू की. जांच में पुलिस को पंधेर के फ्लैट के आसपास नालों में 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे. पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंधेर और उनके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था.

सुरेंद्र कोली नेक्रोफीलिया की बीमारी से ग्रसित होने की कही गई थी बात

जांच में पता चला कि बच्चों का यौन शोषण किया जाता था और उसके बाद आरोपी उनका मर्डर कर देते थे. बाद में यह भी सामने आया कि सुरेंद्र कोली नेक्रोफीलिया की बीमारी से ग्रसित हो गया था. इस मानसिक व्याधि से पीड़ित लोग लाशों के साथ सेक्स करते हैं. ये भी आरोप लगा था कि मालिक और नौकर बच्चों को मारकर उनका अंग निकाल लेते थे.

CBI कोर्ट ने जुलाई 2017 में सुनाई थी फांसी की सजा

इस मामले की जांच बाद में CBI को सौंपी गई थी. जुलाई 2017 में गाजियाबाद की स्पेशल CBI कोर्ट ने एक 20 साल की महिला की हत्या मामले में पंधेर और कोली को मौत की सजा सुनाई थी. दोनों ने सीबीआई कोर्ट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

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