छत्तीसगढ़जनसंपर्क छत्तीसगढ़

रायपुर साहित्य उत्सव से राष्ट्रीय फलक पर उभरेगी छत्तीसगढ़ की साहित्यिक पहचान : उपमुख्यमंत्री अरुण साव….

रायपुर : रायपुर साहित्य उत्सव के शुभारंभ अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने  देशभर से आए साहित्यकारों, विचारकों और साहित्य प्रेमियों का छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक परंपरा का जीवंत उत्सव है।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि माता शबरी, माता कौशल्या और छत्तीसगढ़ महतारी की यह धरती भगवान श्रीराम का ननिहाल है। ऐसे पावन स्थल पर, छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष और बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती सदैव महान साहित्यकारों की उर्वर भूमि रही है और यह उत्सव उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का सशक्त मंच बनेगा।
उन्होंने आयोजन समिति और सभी सहयोगियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि रायपुर साहित्य उत्सव प्रदेश की साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उद्घाटन समारोह में छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन के पीछे तीन माह का निरंतर परिश्रम और एक दूरदर्शी सांस्कृतिक कल्पना निहित है। उन्होंने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर सभी अतिथियों, साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों को शुभकामनाएं देते हुए मां शारदा का स्मरण किया।

श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री की कल्पना के अनुरूप इस साहित्य उत्सव को आकार दिया गया है, जिसका उद्देश्य पिछली पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी के बीच साहित्य के माध्यम से एक सशक्त सेतु का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि देशभर में चल रहे अन्य साहित्य महोत्सवों के बावजूद ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों की उपस्थिति इस आयोजन की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को दर्शाती है।

यह भी पढ़ें :-  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जापान दौरा: निवेश और नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम….

अमृतकाल का गणतंत्र भारत को आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ रहा है : डॉ. कुमुद शर्मा

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति कुमुद शर्मा ने “अमृतकाल में गणतंत्र” विषय को संबोधित करते हुए कहा कि अमृतकाल का यह प्रारंभिक चरण स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत का मौजूदा नेतृत्व देश की आज़ादी की शताब्दी को स्वर्णिम शताब्दी बनाने के लिए कृतसंकल्प है। डॉ. शर्मा ने कहा कि अमृतकाल के पंचप्राण हमें आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी चेतना, सांस्कृतिक दिशा और इतिहास बोध से जोड़ते हैं।

हमारी कलाएं, साहित्य, लोक परंपराएं और प्रकृति से जुड़ी आस्थाएं ही भारत की आत्मा को परिभाषित करती हैं। उन्होंने साहित्यकार निर्मल वर्मा के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि छोटी-सी घटनाएं भी राष्ट्रीय चेतना और दायित्व बोध का आधार बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय साहित्य और भारतीय भाषाएं सदैव समरसता, एकात्मकता और मानवीय मूल्यों की संवाहक रही हैं। साहित्यकारों और रचनाकारों का दायित्व है कि वे लोक, प्रकृति और संस्कृति से जुड़े इस सांस्कृतिक बोध को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं, ताकि अमृतकाल का गणतंत्र भारत  अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व कर सके।

Show More

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button