

Delhi Liquor Policy Scam Case: अभिषेक बोइनपल्ली को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत.
नई दिल्ली:
दिल्ली कथित आबकारी नीति घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में (Excise Policy Case) में गिरफ्तार बिजनेसमैन अभिषेक बोइनपल्ली को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है.अभिषेक बोइनपल्ली को सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते की अंतरिम जमानत (Abhishek Boinpalli Interim Bail) दे दी है. उसे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था. इसके साथ ही अदालत से अभिषेक को हैदराबाद जाने की अनुमति भी मिल गई है. अब निचली अदालत शर्ते तय करेगी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उसे पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया है. इस मामले में 29 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी.
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गिरफ्तारी की वैधता को दी SC में चुनौती
अभिषेक बोइनपल्ली ने ईडी की तरफ से दायर की गई गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी है. उसने दिल्ली हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की है. बता दें कि अभिषेक ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम की धारा 19 के गैर अनुपालन के आधार पर हाईकोर्ट में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी. यह धारा गिरफ्तारी की प्रक्रिया से संबंधित है. बोइनपल्ली की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के हाल के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि ईडी को आरोपी को गिरफ्तारी की वजह लिखित रूप से बतानी चाहिए.
बोइनपल्ली पर शराब कारोबारियों के लिए काम करने का आरोप
बता दें कि अक्टूबर 2022 में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली के कथित आबकारी घोटाला मामले में अभिषेक बोइनपल्ली को गिरफ्तार किया था. अधिकारियों ने बताया कि अभिषेक बोइनपल्ली दक्षिणी भारत के कुछ शराब कारोबारियों के लिए कथित तौर पर काम करता था. अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने पाया कि वह कुछ महत्वपूर्ण सवालों का जवाब देने से बच रहा था, जिसके बाद उसे देर रात हिरासत में ले लिया गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया. इससे पहले कारोबारी एवं आम आदमी पार्टी के नेता विजय नायर को गिरफ्तार किया गया था. यह मामला राष्ट्रीय राजधानी में शराब के लाइसेंस देने में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है.
कारोबारी विजय नायर की भी हुई थी गिरफ्तारी
सीबीआई ने 27 सितंबर 2022 को दिल्ली के शराब घोटाले या आबकारी नीति घोटाले से संबंधित एक जांच के दौरान इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ओनली मच लाउडर के पूर्व सीईओ, व्यवसायी विजय नायर को गिरफ्तार किया था. इससे पहले अगस्त में सीबीआई ने दिल्ली के शराब घोटाले में एक मामला दर्ज किया था और आठ लोगों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया था. आरोपियों में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, तत्कालीन आबकारी आयुक्त अरवा गोपी कृष्णा, उपायुक्त आनंद तिवारी और सहायक आयुक्त पंकज भटनागर शामिल है.



