देश

Explainer : कभी तालिबान की करता था पैरवी, अब अफगानिस्तान में क्यों मिसाइल दाग रहा पाकिस्तान?

दरअसल, शनिवार (16 मार्च) को पाकिस्तान के नॉर्थ वजीरिस्तान इलाके में आतंकी हमला हुआ था. इसमें दो फौजी अफसर मारे गए थे. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने शहीदों के खून का बदला लिए जाने की बात कही थी. शनिवार को हुए हमले की जिम्मेदारी हाफिज गुल बहादुर ग्रुप ने ली थी. इसके बाद पाकिस्तानी फौज ने कहा था कि यह ग्रुप अफगानिस्तान में पनाह लेता है और बॉर्डर क्रॉस करके पाकिस्तान में हमले करता है. 

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अफगानिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों से की मुलाकात, चाबहार सहित इन मुद्दों पर हुई चर्चा

पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान में घुसकर की एयरस्ट्राइक

पाकिस्तानी सेना ने रविवार-सोमवार (17-18 मार्च) की दरमियानी रात को अफगानिस्तान में घुसकर एयरस्ट्राइक की. पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान में तालिबान के कई ठिकानों पर हमले किए. इस हमले में 3 बच्चों समेत 8 लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है. हाालंकि, पाकिस्तान ने इसे आतंक विरोधी अभियान करार दिया है. 

तालिबान ने भी की जवाबी कार्रवाई

वहीं, अफगानिस्तान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की गई. तालिबान ने उसी पाकिस्तान की सैन्य चौकियों पर मोर्टार दागे. इस हमले में 4 सैनिकों के घायल होने की खबर है. हालांकि, पाकिस्तान ने इसकी पुष्टि नहीं की. 

दोनों मुल्कों के बीच तनाव चरम पर

फिलहाल, दोनों मुल्कों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर आतंकियों को पनाह देने का इल्जाम लगाया है. जबकि, तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

सभी नागरिकों को धार्मिक आजादी की गारंटी देता है हमारा संविधान : CAA को लेकर अमेरिका के बयान पर भारत

यह भी पढ़ें :-  सैयद गिलानी की पोती और शब्बीर शाह की बेटी ने अलगाववाद से बनाई दूरी, भारत में जताई निष्ठा

हम पर आरोप लगाना बंद करे पाकिस्तान- तालिबान हुकूमत

तालिबान हुकूमत के प्रवक्ता मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा- “पाकिस्तान कह रहा है कि उसने आतंकी अब्दुल्लाह शाह को निशाना बनाने के लिए हमला किया. शाह तो पाकिस्तान में रहता है. हम इन हमलों की निंदा करते हैं. हम पाकिस्तान से कहना चाहते हैं कि यह अफगानिस्तान की आजादी पर हमला है. अच्छा होगा कि पाकिस्तान अब हम पर आरोप लगाना बंद करे.”

  TTP को लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में अब ये नया मोड़ देखने को मिला है. अफगानिस्तान के अंदर पाकिस्तान के हमले दोनों देशों के बीच तनाव को और ज्यादा बढ़ाएंगे. ऐसे में सवाल है कि क्या दोनों देश युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं.

TTP क्या है इससे पाकिस्तान को क्या है दिक्कत?

बात 2007 की है. पाकिस्तान में कई सारे आंतकी गुटों ने एक संगठन बनाया. इसे नाम दिया गया तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP. इसका मकसद पाकिस्तान में इस्लामी शासन लाना है. कई आतंकी घटनाओं के बाद अगस्त 2008 में पाकिस्तान ने TTP पर बैन लगा दिया था. वैसे इसकी जड़े 2000 में ही जमनी शुरू हो गई थी. 2001 में जब अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में तालिबान को बेदखल किया, तो उसके कई आतंकी पाकिस्तान भाग आए थे. 2007 में सगंठन को खड़ा करने में अफगानिस्तान से आए आतंकियों का भी हाथ था.

Exclusive : क्या अमेरिका फिलिस्तीनियों को नागरिकता देगा? CAA पर हरीश साल्वे की टिप्पणी

अमेरिकी सरकार की एक रिपोर्ट बताती है कि TTP का मकसद पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ आंतकी अभियान छेड़ना है और तख्तापलट करना है. TTP के नेता भी खुलेआम इसका ऐलान करते हैं.

यह भी पढ़ें :-  World Top 5: ट्रम्प ने न्यू ऑरलियन्स में ट्रक हमले को लेकर डेमोक्रेट्स को बनाया निशाना

पहले अमेरिका का दिया साथ फिर बढ़ाई तालिबान से नजदीकियां

दरअसल, पाकिस्तान की अफगानिस्तान से दोस्ती उसके स्वार्थ को ही दर्शाती रही है. अफगानिस्तान से रूस के जाने बाद जब वहां तालिबानी सरकार बनी, तो पाकिस्तान ने तुरंत समर्थन दे दिया. जब 9/11 का हमला हुआ और अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया, तो पाकिस्तान अमेरिका के साथ हो गया. इसके बाद जब फिर से परिस्थितियां बदलीं तो पाकिस्तान को इस्लाम याद आ गया और तालिबान के सपोर्ट में खड़ा हो गया. 

तालिबान की सरकार जब 2021 में सत्ता में आई, तो पाकिस्तान के साथ जमकर दोस्ती हुई. पाकिस्तान, तालिबानी सरकार को मान्यता दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पैरवी भी करने लगा. हालांकि, यह दोस्ती ज्यादा दिनों तक चली नहीं. पहले आतंकी हमलों को लेकर दोनों देश उलझे, फिर सीमा के मुद्दे पर पाक के साथ झड़पें होने लगीं.

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदरूनी इलाकों में हवाई हमले किए, 3 बच्चों सहित 8 लोगों की मौत

कभी दोस्त अब क्यों बने दुश्मन? 

– पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान आतंकी संगठन TTP को पनाह दे रहा है. हालांकि, तालिबान ने आरोपों को पूरी तरह नकारता है. तालिबान का दावा है कि किसी देश के खिलाफ आंतकी गतिविधि के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देंगे. 

-पाकिस्तान ने यही सोचकर तालिबान को सपोर्ट किया था कि भविष्य में वो जैसा कहेगा वैसा तालिबान करेगा. पाकिस्तान चाहता है अफगानिस्तान डूरंड रेखा को सीमा मानें, जिसके लिए तालिबान तैयार नहीं है. कई बार पाकिस्तान ने वहां पर बाड़ लगाने की कोशिश की है, लेकिन तालिबानी सरकार और स्थानीय लोग उसे उखाड़ कर फेंक चुके हैं. 

– अफ़गान शरणार्थियों के मुद्दे पर भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान आमने-सामने है. पाकिस्तान ने बिना वैध कागज़ात रह रहे लाखों अफ़गानियों को मुल्क से निकाल दिया है. साल 2023 में पाकिस्तान ने ये अभियान चलाया था.

यह भी पढ़ें :-  ये हरगिज गवारा नहीं... सपा का MVA से अलग होने का ऐलान; बाबरी विध्‍वंस पर उद्धव गुट के बयान से भड़की

अफगानिस्तान में दुर्घटनाग्रस्त हुआ विमान भारत का नहीं था: नागर विमानन मंत्रालय

Show More

संबंधित खबरें

Back to top button