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Fact Check: यह मोदी-विरोधी सर्वे NIA ने नहीं करवाया, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा है फर्ज़ी

जांच से साबित हुआ कि इस तरह के सोशल मीडिया पोस्टों में किया जा रहा दावा कतई गलत है…

नई दिल्ली:

आजकल सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर दावा किया जा रहा है कि देश की प्रमुख आतंकवाद-रोधी खुफिया एजेंसी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सर्वे करवाए हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए मतदाताओं में मौजूद समर्थन में गिरावट के संकेत मिले हैं. इसकी सच्चाई जानने के लिए Boom ने एक आधिकारिक सरकारी सूत्र से बात की, जिन्होंने बताया कि NIA किसी भी तरह के राजनीतिक सर्वेक्षण नहीं कराता है. इससे साबित हुआ कि इस तरह के सोशल मीडिया पोस्टों में किया जा रहा दावा कतई गलत है.

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माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट X (अतीत में ट्विटर) पर कांग्रेस पार्टी के एक सदस्य ने भी अंग्रेज़ी कैप्शन के साथ यह दावा पोस्ट किया था, जिसमें कथित सर्वे के कई प्रमुख निष्कर्षों को सूचीबद्ध किया गया. इस पोस्ट का आर्काइव लिंक यहां मौजूद है.

उधर, फेसबुक  पर भी इस दावे को कई यूज़रो ने पोस्ट किया. इस पोस्ट का आर्काइव लिंक यहां मौजूद है.

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Boom ने वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए केंद्र सरकार के एक सूत्र से संपर्क किया, जिन्होंने इस बात की पुष्टि की कि NIA राजनीतिक सर्वे आयोजित करने या जारी करने में किसी भी प्रकार से शामिल नहीं है. अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध पर Boom को बताया, “NIA कोई राजनीतिक सर्वेक्षण नहीं करता है…”

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NIA भारत में आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी के रूप में काम करती है, और मुख्य रूप से आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित अन्य गतिविधियों की जांच और उनसे संबंधित मुकदमे देखती है. राजनीतिक दलों के लिए राजनीतिक सर्वे करना जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है.

उल्लेखनीय है कि आमतौर पर प्राइवेट सलाहकार एजेंसियां तो राजनेताओं और विभिन्न राजनौतिक दलों को ज़मीनी जानकारी देने के लिए सेवाएं प्रदान करती हैं. उदाहरण के लिए ‘द टेलीग्राफ़’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, BJP ने पिछले साल देशभर के सभी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों का व्यापक सर्वे करने के लिए दो चुनाव सलाहकार एजेंसियों को काम पर रखा था, जिनमें से एक चेन्नई और दूसरी दिल्ली में स्थित थी.

इसके अलावा इसी साल की शुरुआत में BJP ने ‘नमो ऐप’ पर ‘जन मन’ ऑनलाइन सर्वे भी शुरू किया था, जिसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों के विचारों को समझना और अप्रैल, 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सत्तासीन पार्टी के प्रदर्शन का आकलन करना था.

यह ख़बर मूल रूप से Boom द्वारा प्रकाशित की गई थी, और इसे शक्ति कलेक्टिव के अंतर्गत The Hindkeshariने पुनर्प्रकाशित किया है.

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