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जज जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह की पेटेंट कानून पर किताब वकीलों और वादियों के लिए होगी मददगार

इस पुस्तक का विमोचन 9 मार्च को दिल्ली में एक भव्य समारोह में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की उपस्थिति में किया जायेगा. पेटेंट कानून में अंतरराष्ट्रीय नाम…लॉर्ड जस्टिस कॉलिन बिर्स, कोर्ट ऑफ अपील इंग्लैंड और वेल्स, डॉ क्लॉस ग्रेबिंस्की, अध्यक्ष, यूनिफाइड पेटेंट कोर्ट, लक्ज़मबर्ग और डॉ एनाबेले बेनेट, ऑस्ट्रेलिया के संघीय न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पुस्तक लॉन्च के अवसर पर उपस्थित रहेंगे. 

2600 से अधिक पेजों की दो खंडों वाली पुस्तक पेटेंट कानून पर टिप्पणी है और लगभग 500 फैसलों का हवाला देती है जो भारतीय अदालतों द्वारा पेटेंट कानून में विकसित किए गए मजबूत न्यायशास्त्र का प्रतिबिंब हैं. पेटेंट कानून पर यह पुस्तक लंबी और कठिन यात्रा की परिणति है, जब प्रतिभा एम सिंह को दिसंबर 2013 में वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया गया था और इस  किताब को पूरा करने में लगभग 8 साल लग गए. 

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे, जिन्होंने शीर्ष अदालत में नोवार्टिस मामले में बहस की थी, उन्‍होंने प्रतिभा को यह पुस्तक लिखने के लिए प्रेरित किया. लेखक इस पुस्तक को प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए भारत के शीर्ष कानूनी दिग्गजों सोली जे सोराबजी और फली एस नरीमन को बहुत धन्यवाद देती हैं, जिनका निधन हो गया है. फली एस नरीमन, जिनका हाल ही में निधन हो गया, उन्‍होंने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले प्रतिभा एम सिंह को एक हाथ से लिखे नोट में अपना संदेश सौंपा था. निमंत्रण में उनका नाम मुख्य अतिथियों में से एक के रूप में शामिल है, क्योंकि निमंत्रण श्री फली के निधन से ठीक पहले छपे थे. प्रतिभा एम सिंह का कहना है कि यह फली नरीमन को श्रद्धांजलि है और वह निमंत्रण को दोबारा नहीं छापना चाहतीं.

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पेटेंट कानून पर जस्टिस 

प्रतिभा एम सिंह की पुस्तक पेटेंट योग्यता की तीन महत्वपूर्ण शर्तों- नवीनता, आविष्कारशील कदम और औद्योगिक प्रयोज्यता पर आधारित है. पेटेंट कानून के एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू ‘पेटेंट का उल्लंघन’ पर भी उपायों के साथ चर्चा की गई है. इस विशाल पुस्तक के साथ पुस्तक पर टिप्पणी के 70 पेज के स्नैपशॉट हैं और इसमें उन जजों के नाम शामिल हैं, जिनके निर्णयों का इस पुस्तक में उल्लेख किया गया है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. डी.वाई चंद्रचूड़ और अन्य मौजूदा जज  शामिल हैं. 

यह किताब AI के विकास के साथ भविष्य में पेटेंट के लिए चुनौतियों से संबंधित है. सवाल यह है कि क्या AI द्वारा निर्मित प्रौद्योगिकियां पेटेंट के योग्य हैं या नहीं, इस समय यह सवाल चल रहा है और इसका कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है. मई 2017 में दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने से पहले प्रतिभा एम सिंह को पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिज़ाइन, कॉपीराइट, इंटरनेट कानून आदि सहित आईपीआर कानूनों के क्षेत्रों को संभालने का गहन अभ्यास रहा.

एक अग्रणी प्रकाशन समूह ने जस्टिस प्रतिभा एम सिंह को 2021 और 2022 के लिए IP के 50 सबसे प्रभावशाली लोगों में शुमार किया है, लेकिन जस्टिस प्रतिभा एम सिंह के समक्ष सुनवाई के दौरान इस किताब का हवाला देने वाले किसी वकील को राहत मिलेगी? जस्टिस  सिंह कहती हैं, “यह पूरी तरह से किसी के अपने जोखिम पर होगा.”

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