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"पूरा देश हमारा समर्थन करेगा…" , लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक

नई दिल्ली:

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर 6 सदस्यीय डेलीगेशन की केंद्र सरकार के साथ बातचीत फेल हो गई है.  लद्दाख की सिविल सोसाइटी (civil society) के नेताओं ने सोमवार को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात के बाद बताया था कि उनकी बातचीत नाकाम रही है. बातचीत नाकाम रहने के बाद एक बार फिर बुधवार को प्रदर्शन की शुरुआत हो गयी. लद्दाख में हो रहे प्रदर्शन को लेकर The Hindkeshariने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से बात की.

The Hindkeshariसे बात करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि 3 फरवरी को लद्दाख की एक तिहाई आबादी ने लेह में प्रदर्शन कर लद्दाख में लोकतंत्र को बहाल करने की मांग की थी. साथ ही लद्दाख को संरक्षित करने की अपील की थी. इसके बाद सरकार के साथ तीन बार बातचीत हुई लेकिन वो असफल रही. सरकार ने हमारी लगभग सभी मांगों को मानने से इनकार किया है. 

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सरकार अपने वादे से पीछे हट रही है: सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक ने कहा कि हमने संविधान के 6वीं अनुसूची लागू करने की मांग की थी. सरकार ने चुनाव के दौरान हमलोगों से वादा किया था कि वो इसे लागू करेगी लेकिन अब सरकार इससे पीछे हट रही है. सरकार अब अपने वादे से पीछे हट रही है.  जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र लागू हो रहा है और हमसे यह छिन लिया गया है. सरकार की इस वादाखिलाफी के खिलाफ आज से हम अनशन पर हैं. आज एक बड़ी सभा हुई है. जिसमें कई हजार लोग पहुंचे थे. 

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पूरा देश हमारा समर्थन करेगा: सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक ने कहा कि ये सरकार राम की भक्ति की बात करती है. राम का मंदिर बनाया गया है. तो हम मानते हैं कि यह मंदिर सिर्फ ईंट और पत्थरों का नहीं बनना चाहिए. राम के आदर्शों पर चलने की भी जरूरत है. राम के आदर्श सच्चाई पर चलने की है. वादों को पूरा करने की है. सरकार अगर भगवान राम की तरह अपने वादों पर खड़ी उतरती है तो लद्दाख की पूरी जनता उनको साथ देगी. लेकिन अगर सरकार वादों को तोड़ती है तो पूरा देश हमारा समर्थन करेगा क्योंकि हम सच्चाई के रास्ते पर हैं. 

आदिवासी आबादी की रक्षा करती है छठी अनुसूची

संविधान के अनुच्छेद 244 के तहत छठी अनुसूची आदिवासी आबादी की रक्षा करती है. इस अनुसूची से भूमि, सार्वजनिक स्वास्थ्य और कृषि पर कानून बनाने के लिए स्वायत्त विकास परिषदों के निर्माण की अनुमति मिलती है. अब तक, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में 10 स्वायत्त परिषदें मौजूद हैं.

दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए अपना अभियान इस बात पर केंद्रित कर रही है कि धारा 370 को निरस्त करने से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों को कैसे फायदा हुआ. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “लेकिन अगर वे चुनाव से ठीक पहले इस मांग को मान लेते हैं, तो यह उनके खिलाफ उल्टा असर होगा.”

5 अगस्त 2019 को केंद्र ने आर्टिकल 370 के प्रावधानों को किया था निरस्त

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था. इसके बाद जम्मू-कश्मीर को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. लेकिन इसके दो साल के अंदर ही लेह और कारगिल के लोगों को राजनीतिक तौर पर बेदखल किया हुआ महसूस करने लगे और तभी से केंद्र के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.

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