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इज़राइल में क्या हुआ? गाजा में इज़राइल-फिलिस्तीन के बीच जारी टकराव की पूरी जानकारी

इजराइल में क्या हुआ था?

सुबह 6.30 बजे, हमास ने गाजा पट्टी से इजराइल पर एक साथ लगभग 5,000 रॉकेट दागे, जिससे देश भर में अलर्ट जारी करना पड़ा.  रॉकेट के गिरने और इजराइल डिफेंस की तरफ से साइरन की आवाज सुनाई देने के साथ ही कई इलाकों में  धुआं फैल गया और लोग इमारतों के पीछे छिप गए.

पूरी तैयारी के साथ हमास ने किया हमला

इजरायल के दक्षिणी शहरों में आतंकवादियों ने मोटरसाइकिलों, एसयूवी और पैराग्लाइडर के साथ घुसपैठ की. इसके बाद आतंकवादियों ने रॉकेट बैराज का उपयोग करके आसपास के इजरायली शहरों और सैन्य चौकियों पर हमला किया, नागरिकों पर गोलियां चलाईं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो में इजराइल के सीमावर्ती शहरों में हमास के आतंकियों को राहगीरों पर गोलीबारी करते हुए देखा गया है. वहीं, सोशल मीडिया पर कथित तौर पर गाजा से आए कुछ वीडियो में आतंकवादियों को जश्न मनाते हुए कई इजरायली सैनिकों के शवों को सड़कों पर घसीटते हुए भी दिखाया गया है.

इजरायल ने क्या कहा? 

इजरायल के रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने एक वीडियो बयान में कहा कि आज, हमने बुराई का चेहरा देखा है. हमास ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के बीच बिना अंतर किए एक आपराधिक हमला किया. उसे बहुत जल्दी एहसास होगा कि उसने एक गंभीर गलती की है. हम गाजा पट्टी की सूरत बदल देंगे. 

ईरान ने हमले का किया समर्थन 

 ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के एक वरिष्ठ सलाहकार ने शनिवार को इजराइल पर हमास के हमले को लेकर अपना समर्थन व्यक्त किया और इसे “गौरवशाली ऑपरेशन” बताया है. याह्या रहीम सफवी ने हमास की सशस्त्र शाखा एजेदीन अल-कसम ब्रिगेड द्वारा घोषित ऑपरेशन के कोडनेम का उपयोग करते हुए कहा, “हम गौरवपूर्ण ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड का समर्थन करते हैं.” इसके साथ ही शनिवार को ईरान के सांसदों ने इजराइल मुर्दाबाद”, “अमेरिका मुर्दाबाद” और “वेलकम फिलिस्तीन” के नारे लगाए. 

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हमास क्या है?

हमास एक फिलिस्तीनी आतंकी समूह है, जिसकी स्थापना 1987 में पहले फिलिस्तीनी इंतिफादा या विद्रोह के दौरान हुई थी. इसका मकसद फिलिस्तीन में इस्लामिक राज्य स्थापित करना है. इस विद्रोही समूह की स्थापना सेख अहमद यासीन ने की थी. 12 साल की उम्र से व्हीलचेयर पर रहने वाले अहमद यासीन ने साल 1987 में इजराइल के खिलाफ पहले इंतिफादा का ऐलान किया था. इंतिफादा का मतलब बगावत करना या विद्रोह करना होता है. इस फिलिस्तीनी चरमपंथी समूह को ईरान का समर्थन प्राप्त है.

इज़राइल और फिलिस्तीन विवाद का क्या है इतिहास? 

पहले विश्व युद्ध में ओटोमन साम्राज्य की हार के बाद ब्रिटेन ने फिलिस्तीन पर नियंत्रण हासिल कर लिया था. फिलिस्तीन में यहूदी अल्पसंख्यक थे और अरब बहुसंख्यक थे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ब्रिटेन को फिलिस्तीन में यहूदी मातृभूमि बनाने का काम सौंपा था. इस पर दोनों समूहों के बीच तनाव बढ़ गया.

फिलिस्तीन में यहूदी अप्रवासियों की संख्या में 1920 और 1940 के दशक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. कई यहूदी यूरोप में उत्पीड़न से भाग गए और मातृभूमि की तलाश में यहां पहुंचे.

यहूदियों और अरबों के बीच तनाव बढ़ने लगा और साथ ही ब्रिटिश शासन का प्रतिरोध तेज हो गया. सन 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो अलग-अलग यहूदी और अरब राष्ट्रों में बांटने के लिए वोटिंग की. इसमें येरूशलम को अंतरराष्ट्रीय प्रशासन के अधीन रखा गया. यहूदी नेतृत्व ने योजना को स्वीकार कर लिया, लेकिन अरब पक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया और इसे कभी लागू नहीं किया.

संघर्ष को समाप्त करने में नाकाम रहे ब्रिटिश अधिकारी सन 1948 में पीछे हट गए और यहूदी नेताओं ने इजराइल की स्थापना की घोषणा कर दी. कई फिलिस्तीनियों ने इसका विरोध किया और युद्ध छिड़ गया. पड़ोसी अरब देशों ने इस मामले में सैन्य बल के साथ हस्तक्षेप किया. सैकड़ों-हजारों फिलिस्तीनी भाग गए या उन्हें अपने घरों से निकाल दिया गया, जिसे वे अल नकबा या “द कैटास्ट्रोफ” कहते हैं.

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