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इजराइल का एयर डिफेंस सिस्‍टम "आयरन डोम" है बेहद मजबूत, हमलों को ऐसे करता है नाकाम

आयरन डोम प्रणाली विश्‍व की बेहतरीन रक्षा प्रणालियों में से एक है. शनिवार को इसका एक नजारा देखने को भी मिला, जब आयरन डोम ने हमास द्वारा दागे जा रहे रॉकेटों को हवा में ही नष्ट कर दिया और आकाश आग की लपटों से जगमगा उठा. हालांकि, इस बार हमला काफी बड़ा था. लेकिन इसके बावजूद आयरल डोम प्रणाली ने शानदार प्रदर्शन किया. 

आयरन डोम सिस्‍टम क्या है?

आयरन डोम प्रणाली एक जमीन से हवा में मार करने वाला कम दूरी का ‘एयर डिफेंस सिस्‍टम’ है, जिसे कम दूरी पर रॉकेट हमलों, मोर्टार, तोप के गोले और मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) का मुकाबला करने के लिए देश के कई हिस्सों में तैनात किया गया है. आयरन डोम प्रणाली की सीमा लगभग 70 किमी है और इसमें तीन केंद्रीय घटक हैं जो मिलकर इसे पूरा करते हैं. ये घटक हैं- डिटेक्शन और ट्रैकिंग रडार, युद्ध प्रबंधन, हथियार नियंत्रण और  20 तामीर मिसाइलों से लैस लॉन्चर.

आयरन डोम सिस्‍टम साल 2011 से इजराइल की रक्षा कर रहा है. 2006 के लेबनान संघर्ष के दौरान, हिजबुल्लाह द्वारा हजारों रॉकेट दागे गए और हाइफ़ा सहित कई उत्तरी क्षेत्रों पर हमला किया गया, जिसमें कई लोग मारे गए. 2006 के हमलों ने इज़राइल को अपनी वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए प्रेरित किया था.

कैसे काम करता है ‘आयरन डोम सिस्‍टम’?

जब किसी रॉकेट को इजराइल की ओर दागा जाता है, तो डिटेक्शन और ट्रैकिंग रडार इसका पता लगाता है और हथियार नियंत्रण प्रणाली को जानकारी भेजता है. इस स्‍तर पर दागे गए रॉकेट के प्रकार, गति और लक्ष्य का पता लगाने के लिए तेजी से जटिल गणना करता है. यदि आने वाले रॉकेट का लक्ष्‍य कोई आबादी वाला क्षेत्र या रणनीतिक प्रतिष्ठान होता है, तो लॉन्‍चर स्‍वयं तामीर मिसाइल को फायर करता है और खतरे को बेअसर करने के लिए रॉकेट को हवा में ही नष्ट कर दिया जाता है. एक बैटरी में तीन-चार लॉन्चर होते हैं और इज़राइल के पास कम से कम 10 हैं. आयरन डोम सिस्टम के निर्माता राफेल दावा करते हैं कि इस एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम की सफलता दर 90 प्रतिशत है और अब तक 2,000 से अधिक हमलों को नाकाम कर चुका है. 

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इस बार क्या हुआ?

हमास की ओर से रॉकेटों की बौछार के बाद भी आयरन डोम सिस्‍टम को अत्यधिक शक्तिशाली पाया गया. दरअसल, कई वर्षों से आतंकवादी समूह हमास आयरन डोम सिस्‍टम में कमजोरी ढूंढने की कोशिश कर रहा है. इस बार वह ऐसा करने में काफी हद तक सफल रहा है.

हमास ने इस बार सिस्टम पर साल्वो रॉकेट हमले (कम समय में लॉन्च किए गए कई रॉकेट) से हमला किया है. इसकी वजह से आयरन डोम सिस्‍टम के लिए सभी लक्ष्यों को भेदना मुश्किल हो गया. इस बार सिर्फ 20 मिनट में 5,000 से ज्यादा रॉकेट लॉन्च किए गए.


हमास लगातार अपनी क्रूड रॉकेट तकनीक विकसित कर रहा है और पिछले कुछ वर्षों में इसने तेल अवीव और यहां तक ​​कि यरूशलेम सहित इज़राइल के प्रमुख शहरों को कवर करने के लिए अपनी सीमा बढ़ा दी है. हालांकि, हमास द्वारा लॉन्च किया गया रॉकेट उसे रोकने के लिए दागी गई तामीर मिसाइल की तुलना में काफी सस्ता है. इजराइल के लिए आयरन डोम का मूल्य इसकी लागत से कहीं ज्‍यादा मायने रखता है. इसने अतीत में खुद को साबित किया है कि यह लक्ष्यों को बेअसर कर सकता है और लोगों की जान बचा सकता है.

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2012 में हमास के साथ संघर्ष के दौरान, इजराइल ने दावा किया था कि गाजा पट्टी से नागरिक और रणनीतिक क्षेत्रों की ओर दागे गए 400 रॉकेटों में से 85 प्रतिशत को बर्बाद कर दिया गया था. 2014 के संघर्ष के दौरान, हमास द्वारा कई दिनों के भीतर 4,500 से अधिक रॉकेट दागे गए थे. इस दौरान 800 से अधिक को रोका गया और लगभग 735 को हवा में नष्‍ट कर दिया गया, इसकी सफलता दर 90 प्रतिशत थी.

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अपग्रेड और 2021 हमले

2021 में इजराइल ने कहा कि उसने रॉकेट और मिसाइल सेल्वो के हमलों को रोकने के साथ-साथ कई मानवरहित हवाई वाहनों को एक साथ नष्‍ट करने सहित अतिरिक्त हवाई खतरों से निपटने के लिए सिस्टम को अपग्रेड किया है. मई 2021 में दो सप्ताह तक चले इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष में शुरुआती दिनों में 1,000 से अधिक रॉकेट दागे गए और पूरे संघर्ष के दौरान 4,500 से अधिक रॉकेट दागे गए. अधिकारियों ने बताया कि संकट के दौरान सिस्टम ने रॉकेटों के खिलाफ 90 प्रतिशत स्ट्राइक रेट दिखाया.

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