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Explainer : इजरायल-हमास युद्ध क्या मोड़ लेगा? क्या यह तीसरे वर्ल्ड वार की है आहट?

युद्ध के ग्यारहवें दिन इज़रायल की सेना ने अपनी उत्तरी सीमा पर लेबनान के अंदर हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए. इज़रायली सेना की बमबमारी में हिज़्बुल्लाह के फौजी ठिकानों को निशाना बनाया गया. हिज़्बुल्लाह ने इज़रायल को चेतावनी दी है कि अगर उसने गाज़ा में अपनी सैनिक कार्रवाई नहीं रोकी, तो वो जंग का नया मोर्चा खोल देगा. हिज़्बुल्लाह ने कल ही लेबनान के अंदर अपने ठिकानों से इज़रायल पर रॉकेट दागे थे. इनके जवाब में इज़रायल की आज की कार्रवाई में वहां की सेना ने दावा किया कि उसने हिज़्बुल्लाह की कई इमारतों और सैनिक ठिकानों को तबाह कर दिया है. इज़रायल अपने टैंकों और तोपखानों से बम दाग़ रहा है. इस कार्रवाई में दोनों ही ओर से कई लोगों के घायल होने की ख़बर है.

हिज़्बुल्लाह को ईरान का समर्थन है और ईरान के विदेश मंत्री पिछले दिनों कह चुके हैं कि हिज़्बुल्लाह इज़रायल के ख़िलाफ़ युद्ध में उतरने को मजबूर हो सकता है.

युद्ध में अब तक 4200 से ज़्यादा लोगों की मौत

उधर गाज़ा में हालात लगातार ख़राब बने हुए हैं. युद्ध में अब तक दोनों ओर से 4200 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और क़रीब 15 हज़ार लोग घायल हुए हैं. कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है. इज़रायल के हमलों में अब तक 2800 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं और क़रीब 11 हज़ार घायल हुए हैं. गाज़ा  के 35 अस्पतालों में 3500 से ज़्यादा लोग भर्ती हैं. अस्पतालों में पहले तो जगह नहीं है और ऊपर से उनमें दवाओं और अन्य ज़रूरी उपकरणों की भारी कमी है. बिजली की कमी ने अस्पतालों के काम को और मुश्किल कर दिया है.

इज़रायल की उत्तरी गाज़ा छोड़ने की चेतावनी के बाद क़रीब छह लाख फ़िलिस्तीनी लोग अपने घर-बार छोड़कर दक्षिणी गाज़ा की ओर चले गए हैं. अब भी एक लाख फ़िलिस्तीनियों को और जाना है. कई लोगों को अपनी पूरी ज़िंदगी ही ख़त्म होती नज़र आ रही है. ग़ाज़ा में युद्ध का सबसे बुरा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है. यूनिसेफ़ पहले ही इस सिलसिले में चेतावनी दे चुका है. संयुक्त राष्ट्र Population Fund (UNFPA) के मुताबिक ग़ाज़ा में क़रीब 50 हज़ार महिलाएं गर्भवती हैं और युद्ध उनकी जान पर भारी पड़ रहा है. इन पचास हज़ार महिलाओं में से दस फीसदी अगले महीने बच्चों को जन्म दे सकती हैं,लेकिन हालात इतने ख़राब हैं कि उनकी सुरक्षित डिलीवरी होनी मुश्किल हो गई है. मानवाधिकार संगठन इस स्थिति पर चिंता जता रहे हैं और इसे वॉर क्राइम बता रहे हैं. लेकिन इज़रायल हमास के ख़िलाफ़ अपनी कार्रवाई रोकने को तैयार नहीं है.

इज़रायल के रक्षा मंत्री ने कहा है कि हमास के पास अब सिर्फ़ दो विकल्प हैं. या तो हमास के लड़ाके जहां हैं, वहीं मारे जाएं या वो समर्पण कर दें. इस बीच इज़रायल ने हमास के एक और कमांडर आयमन नोफ़ाल को मार गिराया है. नोफ़ाल अल क़साम ब्रिगेड की जनरल मिलिट्री काउंसिल का सदस्य था और हमास का सेंट्रल ग़ाज़ा का मिलिट्री कमांडर था. हमास ने उसके मारे जाने की पुष्टि कर दी है. इज़रायल का कहना है कि गाज़ा में क़रीब 200 इज़रायली नागरिकों को हमास ने बंधक बनाया हुआ है. जानकारी के मुताबिक हमास इनके बदले 6000 फिलिस्तीनियों को इज़रायल की जेलों से रिहा करने की मांग कर रहा है, जिसके लिए इज़रायल तैयार नहीं है.

दुनिया भर के सामने आ रहा इज़रायली परिवारों का दर्द

इस बीच उन इज़रायली परिवारों का दर्द दुनिया भर के सामने आ रहा है, जिनके परिवार के लोगों, बच्चों, महिलाओं को हमास के लड़ाके बंधक बनाकर ग़ाज़ा में ले गए. ऐसी ही एक महिला ने दुनिया के नेताओं से अपनी बेटी को छुड़ाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि मैं दुनिया से मांगती हूं कि मेरी बेटी मुझे लौटा दें. दरअसल हमास ने सोमवार रात को एक वीडियो जारी किया था, जिसमें ये दिखा था कि इस महिला की बेटी ज़िंदा है और हमास के कब्ज़े में है. अपनी बेटी को वीडियो में देखकर इस महिला की जान में जान आई. वो चिल्ला उठीं, बार-बार वीडियो देखा कि बच्ची सही सलामत है या नहीं. हमास की क़ैद में बंधक इस लड़की ने कहा कि उसकी देखभाल की जा रही है. मुझे दवा दी जा रही है. मैं सिर्फ़ जल्दी से जल्दी अपने घर, अपने माता-पिता के पास जाना चाहती हूं. कृपया मुझे जल्दी से जल्दी यहां से बाहर निकालें.

इस बच्ची का वीडियो सामने आने से अब ये संभावना जताई जा रही है कि हमास के कब्ज़े में 200 इज़रायली अभी ठीक होंगे. इस महिला ने बाद में एक प्रेस कॉफ्रेंस में दुनिया के नेताओं से कहा कि वो उसकी बच्ची और बाकी बंधकों को बचाने के लिए आगे आएं. इस युद्ध में हमास के हमले में 1400 इज़रायली मारे जा चुके हैं और क़रीब चार हज़ार घायल हैं. 

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पश्चिम एशियाई देशों के दौरे पर अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन

हालात की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन पश्चिम एशिया के दौरे पर हैं. वो लगातार इस इलाके के सभी देशों के नेताओं से मुलाक़ात कर रहे हैं और इस युद्ध को फैलने से रोकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. अमेरिका हमास की कार्रवाई के ख़िलाफ़ खुलकर इज़रायल के साथ है. लेकिन साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन का ये भी कहना है कि अगर इज़रायल गाज़ा पर कब्ज़े की कोशिश करता है तो ये उसकी बड़ी ग़लती होगी. इस बीच एंटनी ब्लिंकेन ने एक कूटनीतिक कामयाबी तब हासिल की, जब उन्होंने मिस्र को इस बात के लिए मना लिया कि वो गाज़ा में फंसे विदेशी नागरिकों को निकालने के लिए अपनी सीमा खोले. ग़ाज़ा की एक सीमा मिस्र के साइनाई प्रायद्वीप से मिलती है और यहां रफ़ा क्रॉसिंग को मिस्र ने बंद किया हुआ है. लेकिन मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल सीसी के साथ मुलाक़ात के बाद इस रास्ते विदेशी नागरिकों को ग़ाज़ा से बाहर निकालने का एक रास्ता मिल गया है. वैसे मंगलवार को रफ़ा क्रॉसिंग पर भी दो हवाई हमले हुए. यहां मिस्र की ओर राहत सामग्री से भरे सैकड़ों ट्रक खड़े हैं और ग़ाज़ा में जाने के इंतज़ार में हैं, लेकिन अब रफ़ाह क्रॉसिंग खुलने की उम्मीद बढ़ गई है.

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा कि रफ़ाह के सिलसिले में मेरी मिस्र के राष्ट्रपति अल सीसी के साथ अच्छी बातचीत हुई. मिस्र ने ग़ाज़ा के लोगों के लिए काफ़ी राहत सामग्री तैयार रखी हुई है और रफ़ाह पोस्ट खुलेगा. हम संयुक्त राष्ट्र, मिस्र, इज़रायल और अन्य देशों के साथ मिलाकर एक व्यवस्था बना रहे हैं. इस व्यवस्था से ग़ाज़ा में उन लोगों को राहत मिल पाएगी, जिन्हें इसकी ज़रूरत है.

एंटनी ब्लिंकेन की इन कोशिशों को अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर की 1974 की उस शटल डिप्लोमेसी से जोड़कर देखा जा रहा है. जब 1973 के इज़रायल से मिस्र के युद्ध के बाद इस पूरे इलाके में हालात बहुत ही ख़राब हो गए थे. हेनरी किसिंजर की वो कोशिशें 1978 में इज़रायल और मिस्र के बीच हुए ऐतिहासिक कैंप डेविड समझौते के तौर पर सामने आई थी. इस समझौते पर अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर, मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात और इज़रायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री मेनाकेम बिगेन ने दस्तख़त किए थे. इससे मिस्र और इज़रायल के बीच मार्च 1979 में हुए ऐतिहासिक शांति समझौते की बुनियाद तैयार हुई. इस समझौते के बाद 1982 में इज़रायल ने साइनाई प्रायद्वीप का कब्ज़ा मिस्र को सौंप दिया था और मिस्र ने इज़रायल को संप्रभु राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी थी. अनवर सादात और मेनाकेम बिगेन को 1978 में इस शांति समझौते के लिए संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

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अब सवाल ये है कि क्या इस बार एंटनी ब्लिंकेन ऐसा कुछ हासिल कर पाएंगे. इज़रायल ने युद् धविराम से साफ़ इनकार कर दिया है. इज़रायल हमास को पूरी तरह सबक सिखाने की ठान चुका है, लेकिन समस्या ये है कि इस कोशिश में ग़ाज़ा में जो हो रहा है, वो एक बड़ा मानवीय संकट बन गया है. जहां लाखों लोग इस लड़ाई का शिकार बन रहे हैं. हालात के मद्देनज़र अब अमरेका के राष्ट्रपति जो बाइडन कल इज़रायल के दौरे पर आ रहे हैं जहां वो इज़रायल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू से बात करेंगे. इसके बाद बाइडन जॉर्डन भी जाएंगे. अपने दौरे से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक ट्वीट किया है, उन्होंने लिखा, “हमास के बर्बर आतंकी हमले के बावजूद इज़रायल के साथ एकजुटता दिखाने के लिए बुधवार को मैं इज़रायल का दौरा करूंगा. इसके बाद मैं गंभीर मानवीय ज़रूरतों पर चर्चा करने के लिए जॉर्डन की यात्रा करूंगा, नेताओं से मिलूंगा और ये स्पष्ट करूंगा कि हमास फ़िलिस्तियों के आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए खड़ा नहीं है.”

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बाइडेन के इस दौरे का महत्व इसलिए बहुत ज़्यादा है, क्योंकि इस लड़ाई के नए मोर्चे खुलने की आशंका बहुत ज़्यादा बढ़ गई है. बाइडेन को कई अरब देशों को इस युद्ध से दूर रहने के लिए मनाने की चुनौती है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फेतह अल सीसी ने शर्त लगाई है कि रफ़ाह क्रॉसिंग तभी खोली जाएगी जब ग़ाज़ा से विदेशी नागरिकों को निकालने के साथ ही ग़ाज़ा के निवासियों के लिए राहत सामग्री अंदर भेजने की मंज़ूरी दी जाएगी. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने साफ़ कर दिया है कि वो ग़ाज़ा पट्टी में आम लोगों और बुनियादी ढांचे पर इज़रायल की कार्रवाई के पूरी तरह ख़िलाफ़ है.

क़तर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जासिम अल थानी का कहना है कि क़तर में हमास का दफ़्तर बंद नहीं किया जाएगा. क़तर ने अपने देश में ईरान के फंड को फ्रीज़ करने से इनकार किया है और कहा है कि इस बारे में जो भी समझौता है उस पर वो अमल करता रहेगा. क़तर का पैसा युद्ध में इस्तेमाल नहीं किया गया है.

उधर ईरान लगातार इज़रायल हमास युद्ध को लेकर अपने तेवर दिखा रहा है और धमकी दे रहा है कि इज़रायल ग़ाज़ा पर हमले रोके, वर्ना उसे उसके नतीजे भुगतने होंगे. ईरान इज़रायल को युद्ध अपराधी बता रहा है और उसका कहना है कि इज़रायल बच्चों और महिलाओं को मार रहा है और इससे पहले कि देर हो जाए उसे अपनी हरक़तों पर काबू करना होगा. ईरान हिज़्बुल्लाह को समर्थन देता है जो लेबनान से इज़रायल पर हमले कर रहा है और खुलकर युद्ध में उतर आने की धमकी दे रहा है.

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अमेरिका ने चीन से किया संपर्क

इस बीच ईरान युद्ध में न उतरे, इसलिए उसे रोकने के लिए अमेरिका चीन से भी संपर्क कर चुका है, जिसके ईरान से अच्छे संबंध रहे हैं. जर्मनी भी हमास पर कार्रवाई के मामले में इज़रायल के साथ है, लेकिन वो भी नहीं चाहता कि ये लड़ाई फैले. इस सिलसिले में अपना समर्थन देने और बातचीत के लिए जर्मन चांसलर ओलफ़ शुल्ज़ भी आज इज़रायल पहुंच गए और इसके बाद मिस्र जाएंगे.

इस बीच इज़रायल और हमास के बीच लड़ाई क्या विश्व युद्ध में तब्दील हो सकती है इसे लेकर अलग-अलग जानकारों की अलग-अलग राय है. अमेरिका के एक अरबपति रे डेलियो का कहना है कि इज़रायल हमास युद्ध के विश्व युद्ध में बदलने की संभावना 50% है. उनके मुताबिक दो साल पहले ये संभावना 35% थी. अगर ये विश्व युद्ध में तब्दील होती है तो कई और जगहों पर इस तरह की झड़पों की स्थिति पैदा हो जाएगी.

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लेकिन कई जानकार कहते हैं कि ये विश्वयुद्ध में भले न बदले, लेकिन एक सीमित युद्ध पश्चिम एशिया में एक क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है. ब्लूमबर्ग इकॉनामिक्स (Bloomberg Economics) ने ऐसे तीन हालात बनाए हैं. पहला सीमित युद्ध- इज़रायल और फिलिस्तीनी इलाकों तक लड़ाई सीमित रहे. दूसरा छद्म युद्ध यानी (Proxy War) – इज़रायल और ईरान के बीच छद्म युद्ध लेबनान और सीरिया तक फैल जाए. तीसरा सीधा युद्ध – इज़रायल और ईरान के बीच फौजी झड़प शुरू हो जाए.

जानकारों का साफ़ मानना है कि ये युद्ध अगर फ़ैला तो दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत घातक साबित होगा. इन हालात के बीच इज़रायल की सेना ग़ाज़ा पट्टी पर ज़मीनी रास्ते से हमले के लिए तैयार है. उसके टैंक, तोप और तीन लाख से ज़्यादा सैनिक मोर्चे पर डटे हुए हैं. लेकिन अभी तक इज़रायल की सरकार का ज़मीनी कार्रवाई शुरू करने के लिए आदेश नहीं मिला है. इज़रायल उत्तरी ग़ाज़ा में हमास की उन सुरंगों को भी तबाह करना चाहता है जिन पर हमास का अस्तित्व काफ़ी हद तक टिका हुआ है.

इस बीच एक सवाल ये भी है कि क्या हमास एक आतंकवादी संगठन है या नहीं? इज़रायल के ख़िलाफ़ जैसी आतंकी कार्रवाई उसने की, उससे ये तो साफ़ है कि उसका काम किसी आतंकी संगठन जैसा ही है. इज़रायल, अमेरिका जैसे कई देश उसे ISIS जैसा ही ख़तरनाक आतंकी संगठन बताते हैं, लेकिन भारत समेत दुनिया के कई देश ऐसे भी हैं, जिन्होंने हमास को अभी तक आतंकवादी संगठन का दर्जा नहीं दिया है. कई देश हमास के समर्थन में भी हैं और याद दिलाते हैं कि ग़ाज़ा पट्टी में उसकी चुनी हुई सरकार है. कई ये भी मानते हैं हमास अपनी छवि बदलने की कोशिश भी करता रहा है.

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